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सीमा (Boundary)

एक ऐसी दुनिया की रीति है |
कैसे इंसानियत जीती है ||
यहा कदम-कदम पर सीमा है |
यह हर चीजों की बीमा है||
सोने से पहले जगने की जल्दी है |
पति झालाता सब्जी में ज्यादा हल्दी है||
यह कैसी है मधुशाला  
पीने तो आए है यहा हाला ,
पर चिल्ला रहे हैं शाला ! तूने ज्यादा डाला  
मेरी ग्लास को तूने बना दिया पटियाला ; 
चलने की सीमा है, रुकने की सीमा है ||
उठने की सीमा है, झुकने की सीमा है ||
खाना, खेलना, कूदना, चढ़ना |
या हो रात में देर तक पढ़ना ||
यहा पीने की भी सीमा है |
और जीने की भी सीमा है ||
सीखने की भी सीमा है |
लिखने की भी सीमा है ||
छुपने की भी सीमा है |
रुकने की भी सीमा है ||
यहा अपनो की है सीमा |
मेरे सपनो की है सीमा ||
नहीं है सीमा कुछ चीजों की ,
सीमा नहीं है अंकुर बीजो की;
सीमा नहीं मेरे धड़कन का ,
और धड़कन मे बस्ती उस तड़पन का ;
सीमा नहीं है आकाश का मेरे सास का ,
और सासो मे बसते उस प्यास का :
बस पता है इतना कि यहा थकने की है सीमा |
और मेरे तपने की है सीमा |||

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1 thought on “सीमा (Boundary)”

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